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बुधवार दिवाली के दूसरे दिन थरुहट व दोन के इलाके में सोहराई मनाया गया। प्राय: सभी घरों में मेहमान आए हैं। तरह - तरह के पकवान बन रहे हैं। धान की नई फसल की कटनी कर चावल बनाया गया है। कोहड़ा की सब्जी बनी है। इसके अतिरिक्त भी कई तरह के व्यंजन बने हैं। सबसे पहले इसे प्रसाद के रुप में मवेशियों को खिलाया गया। उसके बाद मेहमानों को खाना खिलाया गया। पालतु पशुओं की पूजा अर्चना की भी प्रथा है।