भरत के रहस्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ जून 2014 को पीलीभीत टाइगर रिजर्व की घोषणा की थी। इसके बाद जंगल को नया दर्जा मिल गया। टाइगर रिजर्व की पांच रेंजों माला, महोफ, हरीपुर, दियोरिया कलां में 71288 हेक्टेयर में जंगल फैला हुआ है। जंगल में लुप्तप्राय बाघ, तेंदुआ, हिरन, बंगाल फ्लोरिकन समेत कई प्रजातियों के वन्यजीव स्वच्छंद रूप से विचरण करते रहते हैं, जो कभी भी देखे जा सकते हैं। इन वन्यजीवों की सुरक्षा चौबीस घंटे की जाती है। प्रत्येक व्यक्ति की मॉनीट¨रग की जाती है, जिससे वन्यजीवों को शिकार से बचाया जाता है। टाइगर रिजर्व के जंगल में दो माह पहले लेजर कैमरे तकनीक से बाघों की गणना का कार्य शुरू किया था, जो अब समाप्त हो चुका है। लेजर कैमरों का डाटा भारतीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण भारत सरकार को भेजा जा चुका है, जहां से बाघ डाटा को कंपाइल कराया जाएगा। सैंपल गणना में बाघ बढ़ने के आसार मिले हैं। हर साल बाघों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन बाघ बिगड़ते चले जा रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघों के लिए जंगल कम पड़ रहा है, जिससे बाघ बाहर निकलकर हमलावर हो रहे हैं। लोगों को अपना निवाला बना रहे हैं। अब तक बाघ हमले में 23 लोगों की जान जा चुकी हैं। वर्ष 2018 में बाघ हमला में हुई मौतें