भरत और ऑस्ट्रेलय क स्कर बर्ड

गुड़ सेहत के लिए बहुत मुफीद है। खाना खाने के बाद थोड़ा गुड़ खा लेने से पेट ठीक रहता है। इसी कारण तमाम तरह की स्वादिष्ट मिठाइयों के बावजूद गुड़ खाने वालों की कमी नहीं है। गुड़ की डिमांड खूब है, इस लिए उसका उत्पादन भी खूब हो रहा है। जिले में दढि़याल गुड़ की मंडी के नाम से जाना जाता है। इस गांव में बाजपुर-मुरादाबाद रोड पर दूर तक कोल्हू ही नजर आ रहे हैं। गांव में घुसने से पहले ही गुड़ की सौंधी खुशबू आने लगती है। गांव में गन्ने का सीजन आते ही गुड़ कोल्हू चलने लगते हैं। इस समय यहां 50 कोल्हू चल रहे हैं। इन कोल्हुओं में गुड़ तैयार करने के साथ ही इसे मंडियों में ले जाकर बेचा जा रहा है। गुड़ कारोबार से गांव की माली हालत भी अच्छी हो गई है, इसलिए यहां तीन बैंक भी खुल गए है। करीब पांच सौ लोग कोल्हुओं पर काम कर रहे हैं। इनमें कोई कोल्हू में गन्ना पेरने का काम करता है तो कोई भट्टी में ईंधन झोंकता है। कई गुड़ कारीगर लगे रहते हैं तो कुछ लोग गुड़ के गुल्ले बनाने का काम करते हैं। सौ से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो तैयार गुड़ को दूसरे जिलों की मंडियों में ले जाकर बेचते हैं। यूं तो गुड़ कोल्हू का कारोबार करीब पांच-छह महीने चलता है, लेकिन इससे जुड़े लोग इन्हीं दिनों में मेहनत करके सालभर के लिए कमा लेते हैं। इस कारोबार से जुड़े सत्यपाल व नजाकत बताते हैं कि कि गुड़ कारोबार ही उनके लिए रोजगार का जरिया है। एक कोल्हू पर 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं। रोज बनता पांच सौ क्विंटल गुड़