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वैक्सीन की बेसब्री में हमें बेफिक्र नहीं होना है। लोग सामान्य जिंदगी में वापस लौटने की आस लगाए बैठे हैं। तीज-त्योहार, शादी-पर्व में यह नियम टूट ही जाते हैं। यह मानव स्वभाव है और लोग गलत भी नहीं है। फिर भी वर्तमान हालात हमें अभी इसकी अनुमति नहीं देते हैं। हाथ धोना, भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचना जैसे कोरोना प्रोटोकाल का पालन करने में कोई बुराई भी नहीं है। इससे हम कोरोना के साथ साथ अन्य बीमारियों से भी बचे रहेंगे। वैक्सीन के बाद भी मास्क ही कवच रहेगा।