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सरकारी अस्पताल हो या फिर निजी। हर जगह मरीजों की भीड़ दिखाई दे रही है। डा. राममनोहर लोहिया जिला चिकित्सालय में ही तकरीबन 648 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। इसमें अधिकांश मरीज बुखार से पीड़ित थे। किसी को बुखार के साथ बदन दर्द भी था। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें डेंगू है। जांच के बारे में पूछा तो बताया कि उन्होंने नर्सिंग होम में चल रही पैथोलाजी में जांच कराई थी। उसके प्लेटलेट्स 80 हजार हैं। निजी चिकित्सक ने प्लेटलेट्स चढ़ाने की बात कही थी। उनके पास इतना रुपया नहीं था कि वहां इलाज कराते। उनकी लोहिया अस्पताल में जांच कराई गई तो उन्हें केवल टायफाइड ही निकला। ऐसे ही न जाने कितने मरीज हैं, जो निजी अस्पतालों में अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। लोहिया अस्पताल के फिजीशियन डा. अशोक कुमार ने बताया कि साधारण बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, लेकिन मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ मनुष्य में डेढ़ से साढ़े चार लाख प्लेटलेट्स होती हैं। बुखार आने पर प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। एक लाख से भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। हालांकि जब 30 हजार से प्लेटलेट्स कम हो जाएं तब विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लें। उनका कहना है कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए खून चढ़ाते हैं। हालांकि जब प्लेटलेट्स बराबर गिरती हैं, तब प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है।