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आमतौर पर सावन में झमाझम बारिश होती है लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ है। बरसात के मौसम के आधे से अधिक दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक बरसात का पूरी तरह से आभास नहीं हुआ है। बारिश नहीं होने से खेती की संभावनाओं पर ग्रहण लगता दिख रहा है। चूंकि अब तक धान का आच्छादन लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। तीन अगस्त तक मात्र तीन प्रतिशत ही धान का रोपा हुआ है। खेतों में पानी नहीं होने से रोपा का काम गति नहीं पकड़ रहा है। जिनके पास पटवन की सुविधा है, वे किसी प्रकार रोपा कर रहे हैं। शेष बारिश के पानी का इंतजार कर रहे हैं। जिले में सिचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। धान के आच्छादन का लक्ष्य 36,500 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है लेकिन सिचाई की सुविधा मात्र 12 प्रतिशत ही है। भूमि संरक्षण द्वारा पानी संचय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष लाखों नहीं करोड़ों खर्च हो रहे हैं लेकिन सिचाई की सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा है। वैसे पटवन से धान का आच्छादन संभव नहीं है। धीरे-धीरे अब किसान भी निराश होने लगे हैं। धान का बिचड़ा तैयार है परंतु पानी के अभाव में बिचड़े पीले पड़ रहे हैं। सदर प्रखंड के देवरिया गांव निवासी कृषक उमाशंकर कहते हैं कि अब धान की उपज संभव नहीं है। गढा खेतों में खेती की थोड़ी बहुत संभावनाएं हैं। बरैनी के ब्रह्मादेव महतो कहते हैं कि हालात बहुत बदतर है। यही स्थिति रही, तो पीने का पानी नहीं मिलेगा। ब्रह्मदेव कहते हैं कि बिचड़ा तो कर दिया गया है लेकिन रोपा अब तक शुरू नहीं हुआ है। रोपा के लिए समय है लेकिन जब तक पानी नहीं होगा, तब तक रोपा संभव नहीं है।