apsc assam forest ranger recruitment 2018

धरती मां ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष भगवान सिंह बिष्ट कहते हैं कि इनके इस प्रोजेक्ट से दिव्यांगों और घरेलू महिलाओं को स्वावलंबी बनने का मौका मिल रहा है। पहले वह प्लास्टिक की बोतल से लैंप और प्लांटर बनाया करते थे। ऐसे ही वेस्ट प्लास्टिक से आकर्षक कृतियां बनाते थे। नेशनल जूट बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय को जब हमारी गतिविधियों का पता चला, तो हमें उन्होंने कई राज्यों की प्रदर्शनियों में स्टाल लगाने के मौके दिए। हमारे ट्रस्ट की ओर से दिल्ली, राजस्थान ,उत्तराखड ,पंजाब, चंडीगढ़ हिमाचल, उत्तर प्रदेश में स्टाल लगए गए। इन प्रदर्शनियों में हमें पश्चिम बंगाल से आए हुए जूट हस्त कलाकारों से कच्चा माल मिलने लगा। हमने कई महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा। अब हम सूरजकुंड मेले की तैयारी कर रहे हैं। बिष्ट कहते है कि कई इकाइयों में जूट से कारपेट तैयार होते हैं। कारपेट बनने के बाद जूट के कई टुकड़े बेकार हो जाते हैं। हमारा मकसद है कि इसे इधर-उधर न फेंका जाए। बैग बना कर हम इसका सदुपयोग करते हैं।