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राजनीति के साथ धर्म के घालमेल को शास्त्रीजी ने स्पष्ट रूप से नकार दिया था। पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बीबीसी की एक रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हिंदू होने के चलते शास्त्रीजी ने पाकिस्तान पर हमला किया। शास्त्रीजी ने उस जनसभा को संबोधित करते हुए टिप्पणी की, ‘यहां मैं हिंदू हूं। इस जनसभा की अध्यक्षता कर रहे मीर मुश्ताक एक मुसलमान हैं। आपको संबोधित कर चुके मिस्टर फ्रैंक एंथोनी ईसाई हैं। इनके अलावा सिख और पारसी भी यहां मौजूद हैं। हमारे देश की विशिष्टता यही है कि यहां सभी धर्मो के लोग रहते हैं। हमारे यहां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च हैं, लेकिन हम इन्हें राजनीति में नहीं लाते। भारत और पाकिस्तान में यही अंतर है। हममें से हर एक पूरी तरह भारतीय है, जैसे दूसरे हैं।’ असल में शास्त्री एक भिन्न भारत में रहते थे- ऐसा भारत जो उनके भीतर सदैव जीवित रहता था। आज उनकी जन्म तिथि पर उनके साथ उनके मूल्यों को भी याद किया जाना चाहिए।