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सीतामढ़ी। आजादी से पूर्व का सोनबरसा प्रखंड मुख्यालय स्थित रामजानकी पोखर का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्ति के कगार पर है। प्रशासनिक लापरवाही व स्थानीय लोगों की उपेक्षा के कारण तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। प्रखंड में दर्जनों तालाब हैं, लेकिन रख रखाव के कारण लगभग सभी पर संकट के बादल छाए हुए हैं। आजादी से पूर्व वर्ष 1932 में सोनबरसा निवासी नन्दीपत महतो व जीतू महतो द्वारा जनहित में करीब तीन एकड़ जमीन पर तलाव का निर्माण कराया गया था। साथ ही एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। तालाब व मंदिर तक जाना लोगों की दिनचर्या थी। मंदिर श्रद्धा के रूप में तो तालाब आवश्यक आवश्यकता की पूर्ति के लिए लोगों के लिए बहुपयोगी था। बुजुर्गों का कहना है कि उस समय तालाब का पानी स्वच्छ रहता था। लोग अपने घर में खाना बनाने के लिए इस तालाब के पानी इस्तेमाल करते थे। सड़क पर चलने वाले लोग भी खड़े होकर घंटों तक तालाब के अंदर तैरती मछलियों को देखा करते थे। सुबह-शाम लोग तालाब की सुंदरता को निहारते थे। धार्मिक कार्य व विभिन्न कर्मकांड के लिए इस तालाब का पानी काफी उपयोगी माना जाता था। लेकिन, बढ़ते प्रदूषण व गंदगी के कारण धीरे-धीरे यह तालाब अपनी पहचान खोता जा रहा है। अब तो स्थिति यह है कि पीने की बात तो दूर लोग इस तालाब में नहाने से भी परहेज कर रहे हैं। 85 वर्षो में एक बार भी नहीं हुई पोखर की उड़ाही : आजादी से पूर्व बने इस तालाब की उड़ाही आज तक नहीं कराई गई है। नतीजन पोखर का पानी धीरे-धीरे गंदा होता चला गया। आलम यह है कि तालाब में गंदगी का अंबार दिखाई देने लगा है। लोग अब इस तालाब में कूड़ा भी डालते हैं। इससे तलाव का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया है।