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सिद्धार्थनगर : सशक्त ग्राम पंचायत सुदृढ़ लोकतंत्र का आधार है। आधी आबादी को ध्यान में रखकर ही पंचायतों को सशक्त करने के मकसद से महिलाओं को आरक्षण दिया गया। बावजूद इसके अधिकतर ग्राम पंचायत जिनका प्रतिनिधित्व महिलाएं कर रही हैं, लेकिन इनकी सहभागिता शून्य बनी हुई है और सारा कार्य पुरुष इनके प्रतिनिधि बनकर कर रहे हैं। यह नारी सशक्तिकरण और सशक्त लोकतंत्र की परिकल्पना पर किसी कुठाराघात से कम नहीं। भनवापुर विकास खंड में कुल 111 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें 57 महिलाएं लोकतंत्र की सबसे छोटी संसद का नेतृत्व कर रही हैं। 54 ग्राम पंचायतों जिनका प्रतिनिधित्व पुरुष कर रहे हैं। लेकिन जहां महिला प्रधान हैं वहां की जिम्मेदारी भी पुरुष ही प्रतिनिधि बन निभा रहे हैं। महिला ग्राम प्रधान अधिकतर उन्नयन प्रशिक्षण व बैठक में भी नहीं पहुंचती। यहां तक कि कुछ प्रतिनिधि कूट रचित हस्ताक्षर के सहारे ग्राम पंचायत के सभी कार्यों का निर्णय भी आसानी से कर रहे हैं। यह पंचायती राज अधिनियम के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। ब्लाक की अधिकतर महिला प्रधान सिर्फ जीतने के बाद प्रमाणपत्र लेने के लिए पहुंची थीं। उसके बाद की बैठकों में इनकी जगह प्रतिनिधि ही बैठकों व प्रशिक्षणों में दिखते हैं।