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बता दें, कंसाली में दो बांध ऐसे है जहां ट्रैक्टरों के आने-जाने के रास्ते पहाड़ तक कटे हुए है। इसके अलावा नूंह के गांव कोटला व मेवली में भी जगह-जगह से मिट्टी तोड़कर बांध खराब किए हुए है। यही हाल नांगल मुबारिकपुर, नौटकी, बालोज गांव का भी है। बरसात के इस मौसम में बांधों के टूटे होने के कारण पूरा पानी निकलने का अंदेशा है। हरियाणा सरकार ने जिस फायदे के लिए बांध बनाए थे वह बेकार दिखाई दे रहा है। ऐसे हालात है कि जल स्त्रोतों में पानी का संचयन नहीं हुआ तो हालात और भयंकर हो जाएंगे। फिलहाल खंड के 68 गांवों में से 28 गांव ऐसे है जहां बिल्कुल खारा पानी है। मवेशी भी इस पानी को नहीं पीते। इसी क्षेत्र के 200 से ज्यादा तालाब पिछले कई साल से सूखे पड़े है। बांध एवं तालाबों में पानी नहीं होने के कारण लोग टैंकरों के सहारे से मवेशियों को पानी पिलाते आ रहे है। कंसाली गांव के पूर्व सरपंच हारून ने बताया कि कई साल से बांध की मिट्टी वाली दीवार टूटी हुई है। बरसात होने पर पूरा पानी बांध से निकलकर चला जाता है। क्षेत्र में बने बांधों और तालाबों के बारे में जानकारी ली जाएगी। जो जिस विभाग का है, वही विभाग इसकी देखभाल करेगा। हमारे क्षेत्र में हमारे विभाग के द्वारा आने वाले बांधों की मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।